राजस्थान के प्रमुख दुर्ग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी राजस्थान की सभी प्रकार की प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपयोगी
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
चितौड़ के किले का वास्तविक नाम चित्रकूट है।
केवल एक कोटि ‘धन्व दुर्ग' को छोड़कर चित्तौड़गढ़ को सभी कोटियों में रखा जा सकता है.
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
राजस्थान में कहावत कही जाती है कि 'गढ़ तो गढ़ चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़या।' चित्तौड़ दुर्ग को दुर्गो का सिरमौर कहा गया है।
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
यह 1810 फीट ऊँचे पठार पर निर्मित है तथा इसका क्षेत्रफल 28 वर्ग कि.मी. है एवं दुर्ग की परिधि लगभग 13 कि.मी. है।
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
राजस्थान के किलों में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा चित्तौड़ का किला है। इसे भारत का सबसे लम्बा किला भी कहा जाता है। यह गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर स्थित है।
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
मेवाड़ में गुहिल राजवंश के संस्थापक बप्पा रावल ने अंतिम मौर्य शासक मान्मोरी को पराजित कर आठवीं शताब्दी के लगभग चित्तौड़ पर अधिकार किया
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
1300 ईसवी में अलाउद्दीन खिलजी ने रावल रतन सिंह को मारकर इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया व अपने पुत्र खिज्र खां को सौंपकर नाम खिज्राबाद कर दिया
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
यह तो रोज 616 मीटर ऊंचे पठार पर स्थित है जिसे मेसा का पठार कहते हैं ,इस दुर्ग के मार्ग में सात विशाल प्रवेश द्वार है जो एक दुसरे से जुड़े है.
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
इसका प्रथम दरवाजा पांडन पोल कहलाता है. इस के पार्श्व में प्रतापगढ़ के रावत बाघ सिंह का स्मारक बना हैकिले का दूसरा प्रवेश द्वार भैरव पोल और तीसरा हनुमान पोल कहलाता है
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
अन्य प्रवेश द्वार गणेश पोल जोड़ला पोल और लक्ष्मण पोल हैं सातवां और अंतिम दरवाजा रामपोल है पूर्की की ओर सूरजपोल चित्तौड़गढ़ दुर्ग का प्राचीन प्रवेश द्वार है
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
इस दुर्ग में रानी पद्मिनी का महल, गोरा एवं बादल महल, कालिका माता मंदिर, सूरजकुंड, जयमल और फत्ता की हवेलियां स्थित हैदुर्ग के भीतर नौखंडा विजय स्तंभ दुर्ग की सबसे भव्य इमारत है
चितौड़ का किला (चित्रकूट दुर्ग, गिरि दुर्ग )
यह हिंदू देवी देवताओं का अजायबघर कहलाता है इसमें रत्नेश्वर तालाब, कुंभ सागर तालाब, हाथी कुंड, चित्रांग मोरी तालाब , आदि जलापूर्ति के मुख्य स्तोत्र थे